Friday, 24 August 2018

Aaj mamma ne topi di hai

आज मम्मा ने टोपी दी है
आज मम्मा ने टोपी दी है
चश्मे से ताने बुनबुन के
धागों से गुत्थी चुनचुन के
सहला-सहला के बाल को
शक्लों पर शोभा भरती है :::: आज मम्मा ने टोपी दी है
इस टोपी के बिना जवानी
जिन्दादिली अधूरी है
कितनी सस्ती सिर ही रहती
ऊचाई पगपग पर कहतीं
मुझमें जीवन ऊर्जा भरती है ::::: आज मम्मा ने टोपी दी है
जब मैं गर्दन ऊंची कर लूं
तो इतराती मेरी टोपी है
जब मैं गर्दन नीची कर लूँ
तो इठलाती मेरी टोपी है

जब-जब भी सर पर रहती है ::::: आज मम्मा ने टोपी दी है

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