आज मम्मा ने टोपी दी है
आज
मम्मा ने टोपी दी है
चश्मे से ताने बुनबुन के
धागों से गुत्थी चुनचुन के
सहला-सहला
के बाल को
शक्लों पर शोभा भरती है :::: आज मम्मा ने टोपी दी है
इस
टोपी के बिना जवानी
जिन्दादिली
अधूरी है
कितनी
सस्ती सिर ही रहती
ऊचाई पगपग पर कहतीं
मुझमें जीवन ऊर्जा भरती है ::::: आज मम्मा ने टोपी दी है
जब
मैं गर्दन ऊंची कर लूं
तो
इतराती मेरी टोपी है
जब
मैं गर्दन नीची कर लूँ
तो इठलाती मेरी टोपी है
जब-जब भी सर पर रहती है ::::: आज मम्मा ने टोपी दी है
No comments:
Post a Comment