Friday, 24 August 2018

Shiksha, seekh aur samajh

शिक्षा, सीख और समझ

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शिक्षा संज्ञा है |
सीख क्रिया है |
समझ परिणाम है |
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वर्तमान सन्दर्भ में स्वत्रंत्रता निहित नहीं है आयोजित अथवा   प्रायोजित होता है |
इसमें स्वत्रन्रता निहित है यह जीवन पर्यंत चलने वाली एक स्वतः स्फूर्त प्रक्रिया है
सन्दर्भ, पूर्व ज्ञान एवं प्राथमिकताओं के आधार पर हम सभी अपनी समझ का निर्माण करते हैं|
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 क्या सीखाया अथवा पढ़ाया जाना है यह अमूमन शिक्षकों द्वारा पूर्व नियोजित पाठ्यक्रम के अनुसार तय होता है| स्वायत्तता निहित नही होता है |
सीखने पर किसी का नियंत्रण नहीं होता जयद टार मामलों में हम अनायास अथवा सायास सीखते रहते हैं| स्वायत्तता निहित है |
हमने क्या समझा है अथवा कितना समझा है यह हमारे   अनुप्रयोगात्मक कौशल के प्रदर्शन और उसके परिणाम से दृष्टीगोचर होता है|
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इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है |
इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है |
सीखने वाले की अभिरुचि पर निर्भर करता है |
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इसमें तयशुदा विषयवस्तु सम्मिलित किया जाता है |
रूचि और प्रतिबद्धतता के आधार पर सीखने वाले अपने ज्ञान की संरचना स्वयं करते हैं|
समझ दोनों परिस्थितियों में निर्मित हो सकता है पर स्वयं द्वारा सीखा गया चिरकालिक होता है| सीखाई गयी विद्या अनुप्रयोग तक शायद ही जा पाती है|
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यह शिक्षक आयोजित उपक्रम होता है |
यह छात्र प्रायोजित उपक्रम होता है |
दोनों ही माध्यम से सीख का विकास होता है |

सीखने की पद्यतियां 

1. लेक्चर विधि- इसमें अध्यापक आधारित लेक्चर को सम्मिलित किया जाता है जिसमे अध्यापक केन्द्रित वाचन किया जाता है | 

2. स्टोरी टेलिंग- इस पद्यति से बच्चों और अध्यापकों का अच्छी व्यस्तता हो सकती है इस माध्यम से बच्चों में रूचि और जिज्ञासा की प्रभाविता देखि जाती है |

3. प्रदर्शन पद्यति- इस विधि में किसी जानकारी को करके दिखाकर नाटक, एकांकी आदि के माध्यम से सीख विकसित की जाती है |

4. पुनर्बलन- इस प्रकार की प्रक्रिया में बच्चों को दोहराव कराया जाता है और बच्चों की सीख बनाने की कोशिश की जाती है |

5. असाइनमेंट देकर- बच्चों को काम देकर उनसे व्यवहारिक स्टार पर जानकारी को एकत्र करके पाठ को सीखने की प्रवृति का विकास किया जाता है |

6. प्रश्नोत्तरी के माध्यम से- इस प्रकार में सीख को विकसित करने के लिए पाठ से प्रश्न बनाने को ही प्राथमिकता दी जाती है इस में उत्तर जानकारी के संप्रेषण को प्राथमिकता नहीं दी जाती है |

7. टीएलएम द्वारा- इस प्रकार के शिक्षण प्रणाली में शिक्षण अधिगम सामग्री के रूप  में सामग्रियों को प्राथमिकता दी जाती है |

8. प्रोजेक्ट और असाइनमेंट- प्रोजेक्ट और दत्त कार्यों के द्वारा सीख को बढाने का कार्य किया जाता है |

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