शिक्षा, सीख और समझ
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शिक्षा संज्ञा है |
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सीख क्रिया है |
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समझ परिणाम है |
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वर्तमान सन्दर्भ में स्वत्रंत्रता निहित नहीं है आयोजित अथवा प्रायोजित होता है |
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इसमें स्वत्रन्रता निहित है यह जीवन पर्यंत चलने वाली एक स्वतः स्फूर्त प्रक्रिया है
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सन्दर्भ, पूर्व ज्ञान एवं प्राथमिकताओं के आधार पर हम सभी अपनी समझ का निर्माण करते हैं|
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क्या सीखाया अथवा पढ़ाया जाना है यह अमूमन शिक्षकों द्वारा पूर्व नियोजित पाठ्यक्रम के अनुसार तय होता है| स्वायत्तता निहित नही होता है |
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सीखने पर किसी का नियंत्रण नहीं होता जयद टार मामलों में हम अनायास अथवा सायास सीखते रहते हैं| स्वायत्तता निहित है |
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हमने क्या समझा है अथवा कितना समझा है यह हमारे अनुप्रयोगात्मक कौशल के प्रदर्शन और उसके परिणाम से दृष्टीगोचर होता है|
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इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है |
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इसमें सिखाने वाले का नियंत्रण होता है |
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सीखने वाले की अभिरुचि पर निर्भर करता है |
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इसमें तयशुदा विषयवस्तु सम्मिलित किया जाता है |
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रूचि और प्रतिबद्धतता के आधार पर सीखने वाले अपने ज्ञान की संरचना स्वयं करते हैं|
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समझ दोनों परिस्थितियों में निर्मित हो सकता है पर स्वयं द्वारा सीखा गया चिरकालिक होता है| सीखाई गयी विद्या अनुप्रयोग तक शायद ही जा पाती है|
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यह शिक्षक आयोजित उपक्रम होता है |
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यह छात्र प्रायोजित उपक्रम होता है |
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दोनों ही माध्यम से सीख का विकास होता है |
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