Friday, 24 August 2018

Mama meri kya galti thi

मामा मेरी क्या गलती थी ?
अकबरपुर के इंद्रलोक में, इक बिटिया रुनझुन पलती थी |
अब चीख-चीख कर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?

ग्यारह हजार हाईटेंशन बिजली, बदन में मेरे उतर गयी |
धू-धूकर जलते जब देखा, माँ-बाप की ममता सिहर गयी |
जिसने भी हालत देखा, उसकी ही आँखे बरस गयीं |
अस्सी फीसद जलने के बाद, मैं बूँद-बूँद को तरस गयी |
सूखी आँखों से बिन आँसू, रोटी थी और संभलती थी |
अब चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?

मामा मुझको पानी देदो, मुझको खाना भी खाना है |
अस्पताल से लेके चलो, नानी जी के घर जाना है |
स्कूल बैग में है बोतल, मैं बोतल भरकर लाती हूँ |
कोई नहीं दे रहा पीने को मैं पानी खुद पी आती हूँ |
अब कर दो बिदा मामा मुझको जीवन से कोई आस नहीं |
रक्षा करना माँ-बाबू का ईश्वर पर कोई विश्वास नहीं |
बिफर रही यमराज से कहकर, ले जाने की क्या जल्दी थी |
अब चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?

मेडिकल स्टोर पे गए ही क्यूँ, दवाई लेने पापा तुम |
इतनी बेरहमी में ईश्वर का, हाथ जरा न कांपा क्यूँ |
एक बात पूछती थी सबसे, कब तक मैं ठीक हो जाउंगी |
हाथ जल गए हैं मेरे, कैसे मैं लिख-पढ़ पाऊँगी |
कोई भी आसरा नहीं बचा, डॉक्टर की नहीं कुछ चलती थी |
अब चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?

बिजली के खंभों पर मामा, तारों के जाल लगवा देना |
छोटे प्रयास से अब कोई, नन्ही रुनझुन को बचा लेना |

दिनांक-18 जुलाई 2018 को हाईटेंशन बिद्युत से दुर्घटनाग्रस्त  मेरी नाजुक रुनझुन को समर्पित

रजनीश श्रीवास्तव, अकबरपुर-अम्बेडकर नगर-9838284044

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