मामा मेरी क्या गलती थी ?
अकबरपुर
के इंद्रलोक में, इक बिटिया रुनझुन पलती थी |
अब
चीख-चीख कर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?
ग्यारह
हजार हाईटेंशन बिजली, बदन में मेरे उतर गयी |
धू-धूकर
जलते जब देखा, माँ-बाप की ममता सिहर गयी |
जिसने
भी हालत देखा, उसकी ही आँखे बरस गयीं |
अस्सी
फीसद जलने के बाद, मैं बूँद-बूँद को तरस गयी |
सूखी
आँखों से बिन आँसू, रोटी थी और संभलती थी |
अब
चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?
मामा
मुझको पानी देदो, मुझको खाना भी खाना है |
अस्पताल
से लेके चलो, नानी जी के घर जाना है |
स्कूल
बैग में है बोतल, मैं बोतल भरकर लाती हूँ |
कोई
नहीं दे रहा पीने को मैं पानी खुद पी आती हूँ |
अब
कर दो बिदा मामा मुझको जीवन से कोई आस नहीं |
रक्षा
करना माँ-बाबू का ईश्वर पर कोई विश्वास नहीं |
बिफर
रही यमराज से कहकर, ले जाने की क्या जल्दी थी |
अब
चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?
मेडिकल
स्टोर पे गए ही क्यूँ, दवाई लेने पापा तुम |
इतनी
बेरहमी में ईश्वर का, हाथ जरा न कांपा क्यूँ |
एक
बात पूछती थी सबसे, कब तक मैं ठीक हो जाउंगी |
हाथ
जल गए हैं मेरे, कैसे मैं लिख-पढ़ पाऊँगी |
कोई
भी आसरा नहीं बचा, डॉक्टर की नहीं कुछ चलती थी |
अब
चीख-चीखकर पूछ रही, मामा मेरी क्या गलती थी ?
बिजली
के खंभों पर मामा, तारों के जाल लगवा देना |
छोटे
प्रयास से अब कोई, नन्ही रुनझुन को बचा लेना |
दिनांक-18
जुलाई 2018 को हाईटेंशन बिद्युत से दुर्घटनाग्रस्त मेरी नाजुक रुनझुन को समर्पित
रजनीश
श्रीवास्तव, अकबरपुर-अम्बेडकर नगर-9838284044
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